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विक्रमी संवत् 2080 सन् 2023-24


श्री राजा वीर विक्रमादित्य के साम्राज्य से प्रवृत्त 2080 राष्ट्रीक शाके 1945 आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

जानिए अपने नये संवत्सर के बारे में:


इस विक्रम संवत् का नाम “ पिंगल संवत्” है तथा सौराब्द मान से यह कालयुक नामक संवत्सर है।

किसानों के लिए लाभदायक और सामान्य इति - भीति (फसलों का नुक़सानदायक) देने वाला यह विक्रम संवत् माना गया है। इस संवत्सर के राजा मंगल और मंत्री शुक्र है जो भारत की महाकीर्ति को बढ़ाने वाला है। देश में आंतरिक कलह की स्थिति बनी रहेगी और गर्मी का प्रकोप विशेष रहेगा। परंतु वर्षा भी प्रचुर मात्रा में होने का योग बनता है।


चैत्र नववर्ष के चैत्री नवरात्रि का कलश स्थापना मुहूर्त:

बुधवार दिनांक 22।03।2023 को

  1. प्रातः 6 बजकर 44 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक लाभ और अमृत वेला में शुभ।

  2. दिन में 11 बजकर 15 मिनट से 12 बजकर 15 मिनट तक श्रेष्ठ रहेगा।

नवरात्रि सारिणी
  1. प्रतिपदा - 22-03-2023 - (चेदिचंद एवं गुड़ीपाड़वा) स्वयंसिद्ध मुहूर्त सभी नये कार्यों में श्रेष्ठ

  2. द्वितीया - 23-03-2023 - सिंजारा (राजस्थान)

  3. तृतीया - 24-03-2023 - मत्स्य भगवान जयंती, गणगौर (राजस्थान)

  4. चतुर्थी - 25-03-2023 - श्री गणेश दमनक चतुर्थी

  5. पंचमी - 26-03-2023 - श्री पंचमी

  6. षष्ठी - 27-03-2023 - सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6 बजकर 40 मिनट से पूरा दिन

  7. सप्तमी - 28-03-2023

  8. अष्टमी - 29-03-2023 - दुर्गाष्टमी, अशोकाष्टमी, कन्या पूजन

  9. नवमी - 30-03-2023 - रामनवमी


वास्तु टिप्स
  1. गुडीपाड़वा अर्थात् चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन अपने घर के प्रमुख द्वार पर नई वंदनवार (अशोक के पत्ते की अथवा पुष्प कि) ज़रूर लगावें।

  2. घर की छत या फिर बालकनी में नया धर्म ध्वज या फिर झंडा अवश्य लगायें।

  3. प्रातःकाल सबसे पहले नीम के पुराने पत्ते (1 - 2 दिन पुराने) में काली मिर्च व मिश्री लगाकर खाने से निरोगी रहने में सहायता मिलती है।

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